Indradhanush
Author: नरेन्द्र कोहली
Brand: Penguin
Color: Blue
Binding: hardcover
Number Of Pages: 160
Release Date: 01-12-2018
Details: इस कहानी-संकलन की कहानियों में बनते-बिगड़ते मानवीय संबंधों का जबर्दस्त चित्रण हुआ है। जैसे कि, परिस्थितियाँ कई बार ऐसा मोड़ लेती हैं कि अपने परायों में तब्दील हो जाते हैं . . . समय ऐसा अंतराल पैदा करता है कि वर्षों बाद पुराने शहर में जाने पर पूर्व प्रेमिका से मिलने का भी संयोग नहीं बन पाता . . . जिन बच्चों को माँ-बाप अपना पेट काटकर बड़ा करते और काबिल बनाते हैं, बुढ़ापे में कई बार वे ही बच्चे उन्हें खाने के लिए भी तरसा देते हैं . . . पत्नी पति से काम कराने के तरीके ढूँढ़ ही लेती है . . . गलत के खिलाफ़ बोलने वाले की छवि ऐसी बन जाती है, जैसे वह सब जगह काम बिगाड़ता फिरता हो . . . आदि।
EAN: 9789353490287
Package Dimensions: 8.4 x 5.3 x 0.8 inches
Languages: Hindi
Product Information
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Indradhanush
Indradhanush
Author: नरेन्द्र कोहली
Brand: Penguin
Color: Blue
Binding: hardcover
Number Of Pages: 160
Release Date: 01-12-2018
Details: इस कहानी-संकलन की कहानियों में बनते-बिगड़ते मानवीय संबंधों का जबर्दस्त चित्रण हुआ है। जैसे कि, परिस्थितियाँ कई बार ऐसा मोड़ लेती हैं कि अपने परायों में तब्दील हो जाते हैं . . . समय ऐसा अंतराल पैदा करता है कि वर्षों बाद पुराने शहर में जाने पर पूर्व प्रेमिका से मिलने का भी संयोग नहीं बन पाता . . . जिन बच्चों को माँ-बाप अपना पेट काटकर बड़ा करते और काबिल बनाते हैं, बुढ़ापे में कई बार वे ही बच्चे उन्हें खाने के लिए भी तरसा देते हैं . . . पत्नी पति से काम कराने के तरीके ढूँढ़ ही लेती है . . . गलत के खिलाफ़ बोलने वाले की छवि ऐसी बन जाती है, जैसे वह सब जगह काम बिगाड़ता फिरता हो . . . आदि।
EAN: 9789353490287
Package Dimensions: 8.4 x 5.3 x 0.8 inches
Languages: Hindi
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Description
Author: नरेन्द्र कोहली
Brand: Penguin
Color: Blue
Binding: hardcover
Number Of Pages: 160
Release Date: 01-12-2018
Details: इस कहानी-संकलन की कहानियों में बनते-बिगड़ते मानवीय संबंधों का जबर्दस्त चित्रण हुआ है। जैसे कि, परिस्थितियाँ कई बार ऐसा मोड़ लेती हैं कि अपने परायों में तब्दील हो जाते हैं . . . समय ऐसा अंतराल पैदा करता है कि वर्षों बाद पुराने शहर में जाने पर पूर्व प्रेमिका से मिलने का भी संयोग नहीं बन पाता . . . जिन बच्चों को माँ-बाप अपना पेट काटकर बड़ा करते और काबिल बनाते हैं, बुढ़ापे में कई बार वे ही बच्चे उन्हें खाने के लिए भी तरसा देते हैं . . . पत्नी पति से काम कराने के तरीके ढूँढ़ ही लेती है . . . गलत के खिलाफ़ बोलने वाले की छवि ऐसी बन जाती है, जैसे वह सब जगह काम बिगाड़ता फिरता हो . . . आदि।
EAN: 9789353490287
Package Dimensions: 8.4 x 5.3 x 0.8 inches
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